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संस्कृति के आईने में शिमला - डॉ. राजेश चौहान ( Dr. Rajesh K Chauhan )

  संस्कृति के आईने में शिमला ज़िला शिमला केवल प्राकृतिक सौंदर्य, देवदार के सघन वनों और औपनिवेशिक धरोहरों के कारण ही विख्यात नहीं है, अपितु यहाँ की समृद्ध लोकसंस्कृति एवं मेलों की गौरवशाली परंपरा भी इसे विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान प्रदान करती है। शिमला जनपद के मेले यहाँ के सामाजिक जीवन, धार्मिक आस्था, कृषि संस्कृति, लोककला और पारंपरिक जीवन शैली के जीवंत प्रतीक हैं। पहाड़ों में मेले केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक मेल-मिलाप, व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और देव परंपराओं के संरक्षण का महत्वपूर्ण अवसर भी होते हैं।  शिमला का सांस्कृतिक स्वरूप की झलक केवल शहर तक सीमित नहीं है अपितु इसके प्रमुख कस्बों रामपुर, रोहड़ू, ठियोग, चौपाल, जुब्बल, कोटखाई, कुमारसैन, मशोबरा, ननखड़ी आदि के ग्रामीण परिवेश में भी मिलती है। यहाँ की संस्कृति प्रकृति के साथ सामंजस्य में विकसित हुई है। पहाड़ों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों ने यहाँ के लोगों को मेहनती, सरल और सामूहिक जीवन का पक्षधर बनाया है। यही कारण है कि शिमला की संस्कृति में आत्मीयता और अपनापन विशेष रूप से दिखाई देता है। इतिहास के पन्...